(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

शान्तिपर्व (Mahabharat) - 13 अनुशासनपर्व


॥ श्रीः ॥
13.17. अध्यायः 017
अथ दानधर्मपर्व ॥ 1 ॥
Mahabharata - Anushaasana Parva - Chapter Topics
भीष्मेण युधिष्ठिरंप्रति भक्तिश्रद्धादीनां भुक्तिसाधनताप्रतिपादकव्यासवाक्यानुवादः॥ 1 ॥


Mahabharata - Anushaasana Parva - Chapter Text

`द्वैपायन उवाच।

श्रद्दात्यागं निर्वृतिं चापि पूजां
सत्यं धर्मं यः कृतं चाभ्युपैति।
कामद्वेषौ त्यज्य सर्वेषु तुल्यः
श्रद्धापूतः सर्वयज्ञेषु योग्यः॥ 13-17-1(81765)
यस्मिन्यज्ञे सर्वभूताः प्रहृष्टाः
सर्वे चारम्भाः शास्त्रदृष्टाः प्रवृत्ताः।
धर्म्यैरर्थ्यैर्ये यजन्ते ध्रुवं ते
पूतात्मानो धर्ममेकं भजन्ते॥ 13-17-2(81766)
एकाक्षरं द्व्यक्षरमेकमेव
सदा यजन्ते नियताः प्रतीताः।
दृष्ट्वा मनागर्चयित्वा स्म विप्राः
सतां मार्गं तं ध्रुवं सम्भजन्ते॥ 13-17-3(81767)
पापात्मानः क्रोधरगाभिभूताः
कृष्णे भक्ता नाम सङ्कीर्तयन्तः।
पूतात्मानो यज्ञशीलाः सुमेधा
यज्ञस्यान्ते कीर्तिलोकान्भजन्ते॥ 13-17-4(81768)
एको वेदो ब्राह्मणानां बभूव
चतुष्पादस्त्रिगुणो ब्रह्मशीर्षः।
पादंपादं ब्राह्मणा वेदमाहु-
स्त्रेताकाले तं च तं विद्धि शीर्षम्॥' ॥ 13-17-5(81769)

इति श्रीमन्महाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि सप्तदशोऽध्यायः॥ 17 ॥


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